1.मुद्रासन के द्वारा
मूलाधार चक्र को जागृत करें ध्यान लगाकर एक बार मैं कम से कम १० मिनट तक लं
मंत्र का उच्चारण करें इसके लिए जमीन पर आसन बिछाकर अपने दोनों हाथों को घुटने पर
टिका कर सीधा करें एवं हथेली खोलकर अंगूठे और तर्जनी उंगली को आपस में मिला ले इस
मुद्रा को आराम से बैठकर जब आपको समय मिले यह कर सकते हैं।
2.योग और आसन के द्वारा भी मूलाधार चक्र को जागृत किया जा सकता है इसके लिए
आपको ताड़ासन इसे माउंटेन पोज और वीरभद्रासन इसे वारियर पोज भी कहते हैं दिन मैं
दो बार सुबह और शाम के समय खली पेट करें तो शीघ्र ही लाभ होगा।
3.फूड थेरेपी के द्वारा भी मूलाधार चक्र को जागृत किया जा सकता है इसके लिए
अधिक से अधिक लाल रंग के फल जैसे अनार चुकंदर गाजर इत्यादि फल खाएं।
4.कलर थेरेपी के द्वारा भी मूलाधार चक्र को जागृत किया जा सकता है इसके लिए
अगर आप लाल रंग के कपड़े प्रतिदिन पहनते हैं तो इससे आपको ज्यादा फायदा होगा इसके
अतिरिक्त मिट्टी मिट्टी के मटके का पानी पिए अथवा लाल रंग के कांच की बोतल में
पानी भरकर सूर्य की रोशनी में रखें और उस पानी को पी लें इससे आपको लाभ होगा।
Comments
Post a Comment