मूलाधार चक्र के जाग्रत होने पर व्यक्ति वीर,निर्भीक और आनंदित रहता है।(भाग-1)
मूलाधार चक्र हमारे शरीर का बुनियादी चक्र है जिस पर हमारा शरीर बना हुआ है पुरुषों में अधिकतर यह चक्र बैलेंस होता है जबकि महिलाओं का यह चक्कर असंतुलित होता है। यह शरीर का पहला चक्र है एवं लाल रंग का गुदा और लिंग के बीच 4 पंखुरियों वाले खिले कमल के सामान दीखता है इसे आधार चक्र या रुट चक्र के नाम से भी जानते हैं। 99.9% लोगों की चेतना इसी चक्र पर अटकी रहती है और वे इसी चक्र में रहकर मर जाते हैं। जिनके जीवन में भोग , संभोग और निद्रा की प्रधानता है उनकी ऊर्जा इसी चक्र के आसपास एकत्रित रहती है। मूलाधार चक्र से जुड़े हुए शरीर के अंगों में किडनी पैर घुटने इम्यून सिस्टम हड्डियों के ज्वाइंट और रीड की हड्डी का निचला हिस्सा आते हैं