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मूलाधार चक्र के जाग्रत होने पर व्यक्ति वीर,निर्भीक और आनंदित रहता है।(भाग-1)

  मूलाधार चक्र हमारे शरीर का बुनियादी चक्र है जिस पर हमारा शरीर बना हुआ है पुरुषों में अधिकतर यह चक्र बैलेंस होता है जबकि महिलाओं का यह चक्कर असंतुलित होता है।   यह शरीर का पहला चक्र है एवं लाल रंग का गुदा और लिंग के बीच 4 पंखुरियों वाले खिले कमल के सामान दीखता है इसे आधार चक्र या रुट चक्र के नाम से भी जानते हैं।  99.9% लोगों की चेतना इसी चक्र पर अटकी रहती है और वे इसी चक्र में रहकर मर जाते हैं। जिनके जीवन में भोग , संभोग और निद्रा की प्रधानता है उनकी ऊर्जा इसी चक्र के आसपास एकत्रित रहती है।   मूलाधार चक्र से जुड़े हुए शरीर के अंगों में किडनी पैर घुटने इम्यून सिस्टम हड्डियों के ज्वाइंट और रीड की हड्डी का निचला हिस्सा आते हैं

मूलाधार चक्र को विभिन्न तकनीकों और उपायों के माधयम से जागृत कर सकते हैं (भाग-1)

  1. मूलाधार चक्र को जागृत करने के लिए शारीरिक गतिविधियां करते रहे इसका प्राकृतिक तरीका गार्डन में घास पर नंगे पांव चले , योगासन करें , दिनभर एक ही स्थान पर ना बैठे , जमीन पर बैठे , खेतीबाड़ी से जुड़े हुए काम या बाग बगीचे में या किचन गार्डन लगाकर पौधों की देखभाल करें।   2. मूलाधार चक्र को ऑयल थेरेपी के द्वारा भी जागृत कर सकते हैं इसके लिए एक या एक से ज्यादा ऑयल्स को थोड़ा थोड़ा मात्रा मैं मिलकर मूलाधार चक्र पर लगाना होता है प्रमुखता से उपयोग किए जाने वाले ऑयल जिंजर ऑयल , सैंडलवुड ऑयल , सीडरवुड ऑयल , सिनेमोनबर्क ऑयल है। 3. मूलाधार चक्र को क्रिस्टल थेरेपी के द्वारा जागृत कर सकते हैं उसके लिए आपको कुछ विशेष प्रकार के क्रिस्टल जो कि पत्थर होते हैं और सूर्य से ऊर्जा लेकर व्यक्ति के शरीर में सप्लाई करते हैं सूर्य में सातों रंग पर्याप्त मात्रा में मौजूद होते हैं लेकिन हर एक क्रिस्टल या पत्थर का अपना-अपना प्रकाश ग्रहण करने का तरीका होता है आप इन क्रिस्टल को गले में पहन सकते हैं अथवा हाथों में बांध सकते हैं प्रमुख रूप से जिनसाइट क्रिस्टल , ब्लैकओनिक्स क्रिस्टल , गारनेट क्रिस्टल , र...

मूलाधार चक्र को विभिन्न तकनीकों और उपायों के माधयम से जागृत कर सकते हैं। (भाग-2)

  1. मुद्रासन के द्वारा मूलाधार चक्र को जागृत करें ध्यान लगाकर एक बार मैं कम से कम १० मिनट तक लं मंत्र का उच्चारण करें इसके लिए जमीन पर आसन बिछाकर अपने दोनों हाथों को घुटने पर टिका कर सीधा करें एवं हथेली खोलकर अंगूठे और तर्जनी उंगली को आपस में मिला ले इस मुद्रा को आराम से बैठकर जब आपको समय मिले यह कर सकते हैं।  2 . योग और आसन के द्वारा भी मूलाधार चक्र को जागृत किया जा सकता है इसके लिए आपको ताड़ासन इसे माउंटेन पोज और वीरभद्रासन इसे वारियर पोज भी कहते हैं दिन मैं दो बार सुबह और शाम के समय खली पेट करें तो शीघ्र ही लाभ होगा।  3. फूड थेरेपी के द्वारा भी मूलाधार चक्र को जागृत किया जा सकता है इसके लिए अधिक से अधिक लाल रंग के फल जैसे अनार चुकंदर गाजर इत्यादि फल खाएं।  4 . कलर थेरेपी के द्वारा भी मूलाधार चक्र को जागृत किया जा सकता है इसके लिए अगर आप लाल रंग के कपड़े प्रतिदिन पहनते हैं तो इससे आपको ज्यादा फायदा होगा इसके अतिरिक्त मिट्टी मिट्टी के मटके का पानी पिए अथवा लाल रंग के कांच की बोतल में पानी भरकर सूर्य की रोशनी में रखें और उस पानी को पी लें इससे आपको लाभ होगा।

शरीर के सप्तचक्र जाग्रत होने पर मिलती है आध्यात्मिक उन्नति

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  चक्र एक संस्कृत शब्द है, जिसका अर्थ है पहिया। सात चक्र हैं और उनमें से प्रत्येक में विशेष प्रकार की ऊर्जा निहित होती है जो तंत्रिका तंत्र और अन्य अंगों को भी नियंत्रित करती है । शारीरिक और भावनात्मक अभिव्यक्तियों के साथ-साथ प्रत्येक चक्र का अपना आध्यात्मिक गुण होता है।   प्रत्येक चक्र में ऊर्जा का प्रवाह होता है जो चक्र जागृत अथवा बैलेंस होता है उसमें ऊर्जा का प्रवाह होता है तथा जो चक्र बैलेंस नहीं होता उसमें कम ऊर्जा का प्रवाह होता है शरीर में मौजूद किसी भी प्रकार की मानसिक तथा शारीरिक समस्या को इन चक्रों को जागृत करके ठीक किया जा सकता है अगर कोई चक्र बैलेंस नहीं होता है तो उस चक्र से जुड़े शारीरिक अंगों में दिक्कत आनी शुरू हो जाती है किस चक्र से कौन सा अंग जुड़ा होता है और कौन सा चक्र किस कार्य के लिए उत्तरदाई होता है तथा हमारे शरीर में कहां स्थित होता है इनके क्या प्रभाव होते हैं इनके असंतुलन से क्या होता है एवं इनको संतुलित करने की क्या विधियां या उपाय हैं हम इनके बारे मैं जानेंगे  प्रमुखतः ७ चक्र होते हैं।  1.          ...